कल तक जो पूजी जाती थी,
आज उन्हें तालश रही ये दुनिया,,
कल तक जो थी घूंघट में थी बंद,,
आज जी भर के निहार रही ये दुनिया ,,
कल तक जो कदम पीछे करते थे ,
आज कहते तुम्हारे हुनर का जवाब नहीं ,
मै हु बदलते वक्त का आइना ,
कोई कागज़ की तस्वीर नहीं,
वक्त बदला ,दुनिया बदली ,
और साथ बदले हम ,
फिर भी इस समाज में हमारे,,
लिए भेद भाव ना हुआ कम ,
हम चाँद तक जा पहुचे इनके साथ,,
और कर दिखाया के हम में भी है कुछ बात,
फिर भी एक ही आवाज सुनाई
"तुम हो सिर्फ औरत जात "
आज उन्हें तालश रही ये दुनिया,,
कल तक जो थी घूंघट में थी बंद,,
आज जी भर के निहार रही ये दुनिया ,,
कल तक जो कदम पीछे करते थे ,
आज कहते तुम्हारे हुनर का जवाब नहीं ,
मै हु बदलते वक्त का आइना ,
कोई कागज़ की तस्वीर नहीं,
वक्त बदला ,दुनिया बदली ,
और साथ बदले हम ,
फिर भी इस समाज में हमारे,,
लिए भेद भाव ना हुआ कम ,
हम चाँद तक जा पहुचे इनके साथ,,
और कर दिखाया के हम में भी है कुछ बात,
फिर भी एक ही आवाज सुनाई
"तुम हो सिर्फ औरत जात "


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