बंद कमरे में पसरी ये खामोशी
और सादगी में डूबी ये जिंदगी ,
चमकीले पिंजरे सी लगे कभी,
बाहर सोने से चमक लिए,
अंदर से है कैद में डूबी ये जिंदगी !
पंख कतरे हुए रिवाजो में लिपटी,
सोच के एक ही दायरे में सिमटी ,
अपनों के लिए है अपनी खुशी से दूर ये जिंदगी!
कभी चाहा तोड़ दायरे निकल जाऊ जहां से आगे,
पर सच है कोई अपनेआप से कहा तक भागे?
जैसे बेबसी क सैलाब में डूबी ये जिंदगी!
सोच में है सब रिश्ते सच्चे ,
थोड़े पक्के कभी, कभी डोर से भी कच्चे,
आपनो की भीड़ में भी है तनहा ये जिंदगी,
बस सादगी में डूबी ये जिंदगी....मेरे जिंदगी !


Good one
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